Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji
जिस तरह हर व्यक्ति निस्वार्थ भाव से अपने परिवार की तन, मन, धन से समर्पित होकर पूर्ण रूप जिम्मेदारी/दायित्व उठाते हुए सेवा करता है । उसी प्रकार हर व्यक्ति की अपने समाज के प्रति भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने परिवार की तरह ही अपने समाज के लिये सौच विचार करे तथा समाज के प्रति अपने कर्त्वयों का निर्वाह करे ओर समाज सेवा को एक जिम्मेदारी के साथ निभाये । हमारा परिवार भी समाज का एक हिस्सा होता है । उसी समाज के कारण आज हमारी और हमारे परिवार की पहचान होती है । इसलिये जितनी जिम्मेदारी हमारी हमारे परिवार के लिये होती है उतनी ही जिम्मेदारीयां हमारी हमारे समाज के प्रति भी बनती है ओर इन जिम्मेदारीयों का परिवहन बिना किसी निस्वार्थ भाव के करना समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है ।
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जिस तरह हर व्यक्ति निस्वार्थ भाव से अपने परिवार की तन, मन, धन से समर्पित होकर पूर्ण रूप जिम्मेदारी/दायित्व उठाते हुए सेवा करता है । उसी प्रकार हर व्यक्ति की अपने समाज के प्रति भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने परिवार की तरह ही अपने समाज के लिये सौच विचार करे तथा समाज के प्रति अपने कर्त्वयों का निर्वाह करे ओर समाज सेवा को एक जिम्मेदारी के साथ निभाये । हमारा परिवार भी समाज का एक हिस्सा होता है । उसी समाज के कारण आज हमारी और हमारे परिवार की पहचान होती है । इसलिये जितनी जिम्मेदारी हमारी हमारे परिवार के लिये होती है उतनी ही जिम्मेदारीयां हमारी हमारे समाज के प्रति भी बनती है ओर इन जिम्मेदारीयों का परिवहन बिना किसी निस्वार्थ भाव के करना समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है ।
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