Monday, 30 June 2014

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji,

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji
हम जिस समाज में रहते हैं उन्‍हीं के बीच हम खाते हैं, पीते हैं, जीते हैं व रहते है हमे निस्‍वार्थ भाव से समाज के लोगों की सेवा, मदद, हित करना। इससे पूरे राष्ट्र की व्यवस्था मे सुधार किया जा सकता है । समाज सेवा के द्वारा सरकार और जनता दोनों की आर्थिक सहायता की जा सकती है । पड़ोसियों की सेवा करना भी समाज सेवा ही है । आज हमारे देश का भविष्‍य युवाओं पर निर्भर है, अतः समाज की सेवा करना हर युवा का कर्तव्य है । समाज के सेवकों का यह कर्तव्य है कि वे सच्चे दिल से समाज की सेवा करें । सच्चे हृदय से की गयी समाज सेवा ही इस देश व इस पूरे संसार व समाज का कल्याण कर सकती है ।
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Thursday, 19 June 2014

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji-contact us for solve your matters-

मानव एक सामाजिक प्राणी है । ‘प्राणी’ इस जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है ओर इस समाज के बिना उसका रहना कठिन ही नहीं असंभव है । माता-पिता, भाई-बहन, रिश्‍तेदारों आदि लोगों को मिलाकर ही इस समाज की रचना होती है । समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं है । इसलिए मानव को हर कदम कदम पर समाज की आवश्‍यकता होती है समाज के लोगों के बीच ही हम अपने जीवन का अधिकतर समय व्‍यतित करतें है ।