Sunday, 6 July 2014

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji,

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji
 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना को हम जितना अधिक से अधिक विस्तार देंगे, उतनी ही समाज में सुख-शांति और समृद्धि फैलेगी । मानव होने के नाते एक-दूसरे के काम आना भी हमारा प्रथम कर्तव्य है । हमें अपने सुख के साथ-साथ दुसरे के सुख का भी ध्यान रखना चाहिए । अगर हम सहनशीलता, संयम, धैर्य, सहानुभूति, और प्रेम को आत्मसात करना चाहें तो इसके लिए हमें संकीर्ण मनोवृत्तियों को छोड़ना होगा । धन, संपत्ति और वैभव का सदुपयोग तभी है जब उसके साथ-साथ दूसरे भी इसका लाभ उठा सकें ।
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Friday, 4 July 2014

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji,

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji,
Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji
मानव होने के नाते जब तक हम एक-दूसरे के दुःख-दर्द में साथ नहीं निभाएँगे तब तक इस जीवन की सार्थकता सिद्ध नहीं होगी । वैसे तो हमारा परिवार भी समाज की ही एक इकाई है, किन्तु इतने तक ही सीमित रहने से सामाजिकता का उद्देश्य पूरा नहीं होता । हमारे जीवन का अर्थ तभी पूरा होगा जब हम समाज को ही परिवार माने ।
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Wednesday, 2 July 2014

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji, -

Samaj Sewa Santha By Shri Satpal Arora Ji
 जिस तरह हर व्‍यक्ति निस्‍वार्थ भाव से अपने परिवार की तन, मन, धन से समर्पित होकर पूर्ण रूप जिम्‍मेदारी/दायित्‍व उठाते हुए सेवा करता है । उसी प्रकार हर व्‍यक्ति की अपने समाज के प्रति भी जिम्‍मेदारी बनती है कि वह अपने परिवार की तरह ही अपने समाज के लिये सौच विचार करे तथा समाज के प्रति अपने कर्त्‍वयों का निर्वाह करे ओर समाज सेवा को एक जिम्‍मेदारी के साथ निभाये । हमारा परिवार भी समाज का ए‍क हिस्‍सा होता है । उसी समाज के कारण आज हमारी और हमारे परिवार की पहचान होती है । इसलिये जितनी जिम्‍मेदारी हमारी हमारे परिवार के लिये होती है उतनी ही जिम्‍मेदारीयां हमारी हमारे समाज के प्रति भी बनती है ओर इन जिम्‍मेदारीयों का परिवहन बिना किसी निस्‍वार्थ भाव के करना समाज के हर नागरिक का कर्तव्‍य है ।

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